Saturday, February 25, 2006

परिचय

* जीवन वृत्त

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अनुभूति पर कविताएँ

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सहज जीवन के अप्रतिम रचनाकार
भवानीप्रसाद मिश्र

कविताएँ


* सन्नाटा
* जाहिल मेरे बाने
* सतपुड़ा के जंगल
* गीत फरोश
* वाणी की दीनता
* इसे जगाओ
* बुनी हुई रस्सी
* चार कौए उर्फ चार हौए
* अब के
* कहीं नहीं बचे
* झुर्रियों से भरता हुआ
* तुमने जो दिया है
* वस्तुतः
* नहीं बनेगा
* मैं तैयार नहीं था

* पानी वर्षा री

* बूँद टपकी नभ से

आभार

* हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध जालघर अनुभूति की संपादक डॉ॰ पूर्णिमा वर्मन (शारजाह, यू.ए.ई.) का विशेष सहयोग रहा है।

* श्री यशपाल सिंह रवि, शास्त्री नित्यगोपाल कटारे, डॉ॰ कृष्णगोपाल मिश्र, श्री सन्तोष व्यास के सहयोग के लिये आभारी हैं।
-संपादक

आलेख

* जीवन वृत्त

Wednesday, February 22, 2006

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